चैलेंजिंग चांशल – Part 5 – शिमला और फिर दिल्ली

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कल पूरे दिन की थकान और फिर रात को देर से सोने का नतीजा था कि कोई भी सुबह 10 बजे से पहले नहीं उठा। सभी का बुरा हाल था, किसी के पैर दर्द कर रहे थे तो किसी की कमर।

चाय पीने के बाद फैसला हुआ कि आज यही, संजोली में रुक जाते है। वैसे भी किसी का मन आज तो वापिस दिल्ली जाने का नही था। सो नाश्ते के बाद निकल पड़े शिमला घूमने।

तीन दिन से हेलमेट लगाए हुए सब परेशान हो चुके थे, मुझे तो वैसे ही हेलमेट के अंदर लगने वाले कपड़े से एलर्जी थी तो सिर में इतनी खुजली हो रही थी मानो सिर में जूँ हो गई हों। इसलिए बिना हेलमेट पहने ही निकल गए। सोचा कि शिमला में कौन पूछेगा हेलमेट को।

अगला चौराहा आते ही ट्रैफिक पुलिस वालों ने हमारी 2 मोटरसाइकिल रोकीं और पर्चा फाड़ दिया 1000 रुपये का। शिमला और आसपास की जगह पर मोटरसाइकिल चलाने वाले और बैठने वाले, दोनों को हेलमेट लगाना अनिवार्य है , बिल्कुल दिल्ली की तरह। बाकी किसी और का चालान न हो, इसलिए 2 लोग, जिनका चालान हो चुका था, वापिस हेलमेट लाने चले गए सबके लिए और हम संजोली में बाज़ार में बैठ के गपशप करने लगे। संजोली बहुत ही खूबसूरत जगह है, ये आपको तब पता चलता है जब आप थोड़ा समय वहाँ बिताते हो।

हैलमेट आये, सबने लगाए और चल पड़े शिमला। शिमला पहुच के बाइक खड़ी करी और निकल पड़े मॉल रोड पर। मॉल रोड हमेशा की तरह भरा हुआ था सो थोड़ी देर में ही भीड़ से उकता कर हम रिज पर चले गए। मुझे स्नूकर खेलने का बहुत शौक है, और वहां थोड़ा आगे जा के स्नूकर क्लब मिल गया, 2 गेम खेलने के बाद हम वापिस आ गये रिज पर। वहां काफी देर तक घूमते रहे, फ़ोटो खींची, खाने पीने की चीज़ें चखी और चले आये वापिस संजोली।

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आज भी रात का खाना घर पर ही बनाना था। इस बार पर्ची डॉक्टर साहब की निकली, सो जुट गए वो खाना बनाने में। और हम मस्ती करने में। खाना खा के थोड़ी देर बतियाने के बाद सब सो गए। कल वापिस दिल्ली निकलना था।

सुबह उठ के सभी जल्दी से रेडी हो गए, आज शाम तक दिल्ली पहुचना था मगर हमारा रिश्ता पहाडों से कुछ ज़्यादा ही करीब का है, ऐसे नहीं जाने देते पहाड़ हमें। थोड़ा दूर चलते ही बारिश शुरू हो गयी। बारिश भी इतनी तेज की मानो फिर कभी नहीं होगी। सबने जल्दी से बरसातियाँ निकाल कर पहनी और फिर बारिश में ही निकल पड़े। भीगने से थोड़ी परेशानी तो हो रही थी मगर बारिश की वजह से पहाड़ बहुत ही खूबसूरत लग रहे थे इसलिए चलते गए।

बीच मे एक जगह रुक कर चाय नाश्ता किया गया। मेरी चोट पर बंधी पट्टी गीली हो चुकी थी इसलिए पट्टी बदली गयी। चोट 3 दिन में हवा न लगने की वजह से पकने लगी थी। जाते ही डॉक्टर को दिखाना है। चाय नाश्ते के बाद फिर चल पड़े। बारिश अभी भी हो रही थी। बारिश की वजह से स्पीड बहुत धीमी थी। गीली सड़क पर बाइक फिसलने का खतरा बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है, इसलिए कोई भी 30 की स्पीड से ऊपर बाइक नहीं चला रहा था।

पहाड़ खत्म हो गए, बारिश फिर भी जारी थी। आखिरकार अम्बाला पहुच कर बारिश रुकी। तब तक सभी अच्छे से भीग चुके थे। बरसाती होने बाद भी पानी अंदर तो चला ही गया था। जूते पूरे भीग चुके थे। अम्बाला पहुच कर ढाबे पर हल्का फुल्का खाना खाया और फिर भागे दिल्ली की ओर।

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चलते चलते शाम होने लगी थी और अब भूख लगने लगी थी। अम्बाला में खाया हुआ खाना कुछ ज़्यादा सहारा नहीं दे पाया था। जग्गी जी को खासकर बहुत भूख लगी थी। दीपक जी लीड कर रहे थे, उनसे पूछा तो बोले कि मुरथल पर गुलशन ढाबा पर खाएंगे। उनके हिसाब से वो 5 किलोमीटर दूर था। 15 कि मी हो गए, गुलशन ढाबे का कुछ पता नही था। जग्गी जी भूख के मारे बिलबिला रहे थे मगर दीपक जी चलते जा रहे थे 80-90 की स्पीड पर।

आखिकार गुलशन ढाबा आ गया, मगर तब तक जग्गी जी का गुस्सा सातवें आसमान पर था। वो बड़े गुस्से में थे कि जब भूख लगी थी तो पहले किसी ढाबे पर क्यो नहीं रोका। किसी तरह उन्हें समझाया बुझाया और खाना खाने के बाद हम निकल पड़े दिल्ली।

मुकरबा चौक पहुंच कर सभी रुके और एक दूसरे से विदा ली। सभी को अलग अलग जाना था। मुझे, डॉ साहब और प्रशांत को गाज़ियाबाद, जग्गी जी को फरीदाबाद और बाकी 3 लोगों को दिल्ली में।

इस सफर की कहानी यहीं खत्म होती है। अच्छा सफर था ये, नए लोग मिले, नए दोस्त बने, नई जगह देखी, नई सीख मिलीं।

2 thoughts on “चैलेंजिंग चांशल – Part 5 – शिमला और फिर दिल्ली

  1. शिमला पहुंचकर आखिर सब हीरो बन गये।
    बारिश में बाइक चलाना वह भी पहाड़ों में गजब। एक बार उत्तरकाशी से नरेंद्र नगर तक फरवरी का लास्ट वीक में बाइक चलायी थी। पहाड़ों में ठंड में बहुत बुरा हाल होता है ऐसे ही श्रीखंड जाते हुए नारकंडा तक भीगते गए थेक्षचलती बाइक पर दांत बजने लगे थे…

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    1. Vikas Bhadauria

      जी, दांत तो हमारे भी बज रहे थे, मगर किसी तरह हिम्मत कर के चलते ही रहे.

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